Archive for the ‘हिंदी’ Category

नेताजी का बयान

शहीद दिन के अवसर पर…

अश्विन चंदाराणा

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गीताजी की क़समें खा कर सत्य कई झुठलाए हमने,
उन कर्तब की बात करूँ जो संसद में दिखलाएँ हमने।

जनता ने तो वॉट दीये थे करने उनकी सेवा दिल से,
बंदर के हम वंशज, अपने दिल कहीं लटकाएँ हमने।

संत्री हो या मंत्रीमुखिया, यूँ ही बनता है कोई क्या?
गाजरमूली को दिखलाकर तुम जैसे ललचाएँ हमने।

माँ का दूध न बेचा तो क्या? गाय हमारी माता भी है,
गोहत्या के नारे गा कर, गो के चारे खाए हमने।

अपने देश की करने रक्षा, सैनिक भेजें थे परदेस में,
उनकी विधवाओं की आँखों में आँसू छलकाए हमने।

तुम क्या जानो, हमने क्या क्या खेल किए है देश की ख़ातिर,
छोड़ा दोषी को, निर्दोषों पर कोडें बरसाएँ हमने।

गांधी को गोली से मारा, क्राइस्ट को सूली लटकाया,
सुखदेव भगत शेखर जैसे तख़्ते पर लटकाएँ हमने।
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तितली

तितली                                     अश्विन चंदाराणा

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निबिड़ घास के बीच,
अकारण उगे
पीले पीले बाँस-वन के सहारे,
पीले पल्लु को अपने कंधे पर लटकाए,
तुम खड़ी थी;

इक काली तितली
कहीं से उड कर आई,
और व्याकुल होने लगी, कि कहां बैठुँ?
पीले पल्लु पर,
या पीले बाँस पर?

तुम तो चली गई
थोड़ी देर में, अपनी थकान दूर होने पर;

तीतली आज भी
हरे घास के बीच
पीले बाँसवन में
तुम्हारे पल्लु का साया ढुँढती है।

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